आइये जानते है आतंकवाद क्यों है और इसके कारण क्या है !

 शक्ति राजनीति 

शीत युद्ध के दौर में अमेरिका और सोवियत संघ के मध्य विश्व के अनेक क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए संघर्ष हो रहा था । इसी पृष्ठभूमि में 1979 में सोवियत संघ द्वारा अफ़गानिस्तान में किये गए सैन्य हस्तक्षेप के विरोध में अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान के विद्रोही गुटों ( मुजाहिद्दीन ) को सोवियत सेना के विरुद्ध वित्तीय और सैन्य सहायता दी । सोवियत संघ की सेना तो अफ़ग़ानिस्तान से वापस लौट गई , लेकिन अमेरिका से मिले हथियारों का प्रयोग आगे चलकर अफ़ग़ानिस्तान में उभरने वाले आतंकी समूहों ने किया जिसमें सर्वाधिक प्रमुख 1989 में गठित अलकायदा था । उल्लेखनीय है इसी संगठन की संलिप्तता 1995 में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और 2001 में पेंटागन और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमलों में थी । 


अमेरिका ने 2001 के हमले की प्रतिक्रिया में अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया और उसके बाद अमेरिका को पश्चिम एशिया के अन्य देशों पर भी प्रभुत्व स्थापित करने का वैचारिक आधार मिल गया । इसी क्रम में अमेरिका ने 2003 में इराक पर हमला कर सत्ता परिवर्तन किया । इराक में परंपरागत सुन्नी शासक की जगह अब शिया सरकार निर्मित हुई , जो इराक में बहुसंख्यक भी थे । इराक के शिया शान द्वारा सुन्नी समुदाय की उपेक्षा का आरोप लगा । सुन्नी समुदाय में बढ़ती उपेक्षा और वांचन के भाव ने कट्टरवादी ताकतों को मजबूत वैचारिक आधार दिया और 2011 में इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक का गठन हुआ । इसी बीच अरब विश्व में आतंकवाद शुरू हुए अरब क्रांति का प्रभाव सीरिया पर भी देखा गया , जहाँ सीरिया के शिया शासक बसर अल असद के विरुद्ध ' बहुसंख्यक सुन्नी जनता ने विद्रोह कर दिया । 2013 में बगदादी के नेतृत्व में इराक और सीरिया के सुन्नी विद्रोही आपस में मिलकर इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया ( ISIS ) का गठन करते हैं । 

पहचान का संकट 

वैश्वीकरण के कारण विश्व के आर्थिक , सांस्कृतिक , तकनीकी एकीकरण की प्रक्रिया को गति मिली । लेकिन एकीकरण की यह प्रक्रिया एकसमान नहीं थी , बल्कि इस एकीकरण में पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव ने विश्व में समरूपी समाज का निर्माण करना शुरू कर दिया , जिससे स्थानीय समुदायों में अपनी सांस्कृतिक मानदंडों और मूल्यों के खत्म होने का खतरा महसूस करना उत्पन्न हुआ । इससे इन समुदायों में पहचान का संकट उत्पन्न हुआ , जिसकी प्रतिक्रिया में स्थानीय समुदायों में कट्टरवादी और प्रतिक्रियावादी भावनाएँ मजबूत होने लगीं । इसने पूरे विश्व में सभ्यता के संघर्ष को बढ़ावा दिया । यही कारण है . कि धार्मिक और नृजातीय पहचान पर आधारित अनेक आतंकी संगठनों का उभार देखा गया ।

आर्थिक कारण 

आतंकी समूहों का गठन उन क्षेत्रों में अधिक देखा गया , जहाँ आर्थिक पिछड़ापन अधिक था । इन क्षेत्रों में आतंकी समूहों में भर्ती को रोजगार का एक आकर्षक विकल्प माना जाता है । पाकिस्तान अफ़गनिस्तान की सीमा पर स्थित फाटा क्षेत्र दुनिया का सर्वाधिक खतरनाक क्षेत्र माना गया है। इस क्षेत्र में निर्धनता और बेरोजगारी की स्थिति गंभीर रही है। इसी प्रकार हॉर्न ऑफ अफ्रीकन देशों सोमालिया , इथोपिया , इरीट्रिया और जिबूती के अलावा अफ्रीकी देश नाईजीरिया में भी आर्थिक अभाव आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला प्रमुख कारण रहा है।

तकनीकी कारण 

70 के दशक के बाद से ही आतंकी समूहों की सक्रियता में उभार तब देखा गया , जब परिवहन के साधनों का विस्तार देखा गया । वायुयान के माध्यम से अब दुनिया के अलग - अलग हिस्सों में यात्रा करना आसान हो गया था । वहीं 1990 के दशक में सूचना प्रौद्योगिकी के कारण अब आतंकी संगठन अधिक संगठित होने लगे । 28 | भारत की आंतरिक सुरक्षा : चुनौतियों और समाधान वित्तीय और बैंकिंग संस्थानों के वैश्विक नेटवर्क ने इन्हें आर्थिक रूप में अपना नेटवर्क स्थापित करने में मदद की और हाल के वर्षों में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रचलन का भी लाभ इन आतंकी समूहों को मिला है । सोशल मीडिया के माध्यम से इन्होंने युवाओं को आकर्षित करने के लिए आतंकवाद का ग्लैमराईजेसन किया । आतंकी साहित्य और वीडियो के माध्यम से युवाओं का रेडिवलाइजेसन भी किया । यही नहीं सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकवाद के विकेंद्रीकरण करने में भी इन्हें मदद मिली , जिससे स्वप्रेरित आतंकवाद को बढ़ावा मिला । इसे लोन वुल्फ अटैक के रूप में देखा जा सकता है । आज सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है तथा घरेलू सामग्री से हथियारों के निर्माण की सीख दी जा रही है। यह ग्रास रूट टेररिज्म का बढ़ता प्रसार है ।

राज्य के नीतियों के विरोध में 

प्राय : यह भी देखा गया है कि किसी राज्य की नीतियाँ एक समूह विशेष में घृणा की भावना मजबूत करती हैं और उसके विरुद्ध आतंकी गतिविधियों को प्रेरित करती हैं , जैसे इजरायल की नीतियों के विरुद्ध हिजबुल्लाह का गठन  इसके अलावा व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षा भी आतंकवाद के प्रसार के लिए एक जिम्मेदार कारक है । आतंकी समूहों के गठन के पीछे किसी व्यक्ति विशेष की व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षा भी जिम्मेदार होती है जैसे ओसामा बिन लादेन या बगदादी । 

समकालीन विश्व में आतंकवाद 

समकालीन विश्व में आतंकवाद सर्वव्यापी और वैश्विक रूप ले चुका है । इसमें नवीन प्रवृत्तियों का विकास हुआ , जो निम्नलिखित हैं -वर्तमान समय में आतंकी समूह पूर्व की तुलना में अधिक संगठित , प्रशिक्षित और अत्याधुनिक हथियारों से लैश हो गए हैं । इनके द्वारा अत्याधुनिक संचार उपकरणों और हथियारों का प्रयोग किया जा रहा है । अतः नए तथा हल्के हथियार और विस्फोटकों की उपलब्धता ने इनकी पहुँच और मारक क्षमता को बढ़ा दिया है । आज के परिवेश में कलाशिनकोव संस्कृति ( गन कल्चर ) का विकास हुआ है । इनके द्वारा AK 47 , AK 56 , रॉकेट लॉन्चर , RDX आदि का प्रयोग किया जा रहा है । -वर्तमान समय में परिवहन के साधनों के विकास , बैंकिंग और वित्तीय नेटवर्क के विकास तथा सूचना प्रौद्योगिकी के कारण आतंकी समूहों की भौतिक उपस्थिति विश्व के प्रत्येक क्षेत्र में बढ़ रही है । - अब आतंकी घटनाएँ केवल विकासशील देशों तक सीमित नहीं रह गयी हैं , बल्कि वर्तमान में विकसित देशों विशेषकर यूरोपीय देशों में आतंकी हमले तेज़ी से बढ़े हैं । जैसे — पेरिस , लंदन , ब्रुसेल्स , मैड्रिड आदि पर हुए आतंकी हमले । -वर्तमान में आतंकवाद का निजीकरण भी देखा जा रहा है । साथ ही संगठन व विचारधारा के स्थान पर व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षा अधिक प्रभावी देखी जा रही है । अब आतंकी संगठन अपना निजी तन्त्र , निजी सेना और आचारसंहिता का विकास कर रहे हैं । कई देशों में ये समानांतर अर्थव्यवस्था का भी संचालन कर रहे हैं । -वर्तमान में आतंकी समूहों द्वारा राजनीतिक व्यवस्था को प्रत्यक्ष चुनौती देने की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है । इस सन्दर्भ में आईएसआईएस द्वारा न केवल भू क्षेत्र पर नियंत्रण किया गया बल्कि अपना संविधान , अपनी सरकार और अपनी सेना का भी गठन किया गया । हालाँकि किसी राज्य द्वारा इन्हें मान्यता दी गयी , इसलिये इन्हें प्रोटो स्टेट के रूप में देखा जाता है । -वर्तमान में व्यवहारिक स्तर पर आतंकी समूहों की न कोई विचारधारा है और न ही उद्देश्य क्योंकि इनके लिए आतंक और हिंसा साध्य भी है और साधन भी । ऐसे में इनकी सामाजिक स्वीकार्यता में गिरावट देखी जा सकती है और आम लोगों से इनकी दूरी भी बढ़ती जा रही है ।

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