भारत के राष्ट्रपति के पास कौन-कौन सी शक्तियां हैं ?

भारत के राष्ट्रपति भारत के प्रथम नागरिक होते हैं और राष्ट्रपति के पास बहुत सी शक्तियां होती हैं जो हम आपको आज बताएंगे।
  1. राष्ट्रपति अपने कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग सीधी अथवा अपने अधीन अधिकारियों के द्वारा करता है।
  2. राष्ट्रपति को राज्य के उच्च अधिकारी को नियुक्त करने का अधिकार होता है। वह उच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को भी राष्ट्रपति नियुक्त करता है।
  3. राष्ट्रपति राज्य की रक्षा बलों की सर्वोच्च सेनापति होते हैं। उन्हें शांति की घोषणा करने का अधिकार है।https://chahaknews.blogspot.com/
  4.  राष्ट्रपति को फांसी की सजा माफ करने का भी अधिकार है। 
  5. राष्ट्रपति को राजदूतों की नियुक्ति करने का भी अधिकार है।   
  6. राष्ट्रपति लोकसभा को भी बंद कर सकते हैं।

शक्तियों के इस विशाल भंडार के बावजूद हमारे राष्ट्रपति की स्थिति राज्य के संवैधानिक प्रधान की है । अनुच्छेद -74 ( 1 ) में स्पष्ट कर दिया गया है कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद् की सलाह और सहायता से कार्य करेगा । इस व्यवस्था का आधार हमारी संसदीय शासन प्रणाली है जिसमें मंत्री लोकसभा के प्रति उत्तरदायी हैं ।https://chahaknews.blogspot.com/ राष्ट्रपति पाँच वर्षों के लिए निर्वाचित होता है । उसका निर्वाचन ऐसे निर्वाचक मंडल के सदस्य करते हैं जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य हो । राष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया जाता है ।https://chahaknews.blogspot.com/यदि राष्ट्रपति संविधान का उल्लंघन करे तो संसद के दोनों सदन महाभियोग की प्रक्रिया द्वारा उसे अपने पद से हटा सकते हैं ।उप -राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों द्वारा चुना जाता है और वह राज्यसभा का  सभापति होता है।प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है । मंत्री राष्ट्रपति के प्रसाद - पर्यन्त अपने पद धारण करते हैं। मंत्रिपरिषद् लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है । इसलिए वह एक साथ अपने पद पर बनी रहती है अथवा उससे हटती है । यदि लोकसभा का मंत्रिपरिषद् में विश्वास नहीं रहता तो समूची मंत्रिपरिषद् को त्याग पत्र देना पड़ता है । सामूहिक उत्तरदायित्व का एक अर्थ यह भी है कि मंत्रियों को सामूहिक रूप से एक - दूसरे से भिन्न विचार व्यक्त नहीं करने चाहिए । राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग है ।https://chahaknews.blogspot.com/

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